ग्रेटर नोएडा: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बीते 10 वर्षों के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट डेवलपमेंट की तस्वीर तेजी से बदली है. अब विकास केवल फैक्ट्रियों और आवासीय परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटी, मॉल, क्लब और अन्य आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है. SVG Realty के चेयरमैन और रियल एस्टेट विशेषज्ञ अंकुर मित्तल के मुताबिक, इस बदलाव से आने वाले समय में क्षेत्र की आवासीय मांग और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है.
बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे तीन अलग-अलग विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आते हैं. भौगोलिक रूप से ये क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन विकास के स्तर और संभावनाओं के लिहाज से इनकी अपनी अलग पहचान है. नोएडा का पुराना हिस्सा काफी हद तक विकसित हो चुका है, जबकि ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं तेजी से उभर रही हैं.
नोएडा में अब नए विकास क्षेत्रों पर जोर
अंकुर मित्तल के मुताबिक, नोएडा का पुराना शहरी क्षेत्र काफी हद तक बस चुका है और यहां बुनियादी सुविधाओं का मजबूत ढांचा तैयार हो चुका है. अब महामाया फ्लाईओवर से आगे एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्रों में विकास गतिविधियां अधिक दिखाई दे रही हैं. आवासीय रियल एस्टेट में भी बड़े डेवलपर्स की दिलचस्पी बनी हुई है.
नोएडा में उपलब्ध जमीन और विकास की संभावनाओं को देखते हुए अब नए प्रोजेक्ट चुनिंदा क्षेत्रों में केंद्रित हो रहे हैं. वहीं, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को विस्तार के नए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है.
ग्रेटर नोएडा में इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
अंकुर मित्तल ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में बीते वर्षों के दौरान औद्योगिक विकास के साथ आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों में भी तेजी आई है. अंकुर मित्तल के अनुसार, परी चौक के आसपास का क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा सेंट्रल विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण बन रहे हैं. यहां बड़ी कंपनियों और डेवलपर्स की मौजूदगी क्षेत्र की संभावनाओं को बढ़ा रही है.
उन्होंने बताया कि पहले औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने के बाद आसपास सीमित आवासीय निर्माण होता था. कई बार आबादी बढ़ने के बावजूद स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं होती थीं. अब विकास की योजना में इन सुविधाओं को भी महत्व दिया जा रहा है. बड़े भूखंडों पर उद्योगों की स्थापना के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है, जिससे आसपास आवासीय मांग को भी समर्थन मिल सकता है.
यमुना एक्सप्रेसवे पर रियल एस्टेट को मिल रही नई दिशा
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में औद्योगिक और आवासीय विकास के साथ कमर्शियल गतिविधियों का दायरा भी बढ़ रहा है. अंकुर मित्तल के मुताबिक, यहां फ्लैट और प्लॉट विकसित करने वाले डेवलपर्स के साथ विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की गतिविधियां भी देखने को मिल रही हैं.
बताया कि जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी विकास गतिविधियां इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं. एयरपोर्ट के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और औद्योगिक परियोजनाओं के विस्तार से भविष्य में रोजगार और आवासीय मांग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं की प्रगति और उनके संचालन के साथ स्पष्ट होगा.
अब स्कूल, अस्पताल और यूनिवर्सिटी भी विकास का हिस्सा
अंकुर मित्तल के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में अब केवल इंडस्ट्री और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सुविधाओं पर भी काम हो रहा है. बड़े स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अस्पताल, मॉल, क्लब, बैंक्वेट हॉल और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवासीय सुविधाओं जैसी परियोजनाएं विकास की बदलती दिशा को दर्शाती हैं.
उनका कहना है कि जैसे-जैसे उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे अधिक लोग इस क्षेत्र में रहने के लिए आएंगे. इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और खरीदारी जैसी सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी.
सुनियोजित विकास से बदल रही क्षेत्र की पहचान
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव विकास के दायरे में आया है. अब औद्योगिक इकाइयों और आवासीय कॉलोनियों के साथ उन सुविधाओं को भी विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जो किसी शहर को रहने योग्य बनाती हैं. नोएडा में जहां विकास का बड़ा आधार पहले से तैयार है, वहीं ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे में औद्योगिक विस्तार, कनेक्टिविटी और सामाजिक सुविधाओं के विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं.

