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Asian Games 2026: जापान में हुए एशियन गेम्स 2026 में बेटियों का जलवा देखने को मिला. भारत ने जो 21 गोल्ड मेडल जीते, उनमें से 11 स्वर्ण पदक महिलाओं ने दिलाए, इनमें टीनेजर अनाहत सिंह भी थीं, जो अभी तक कॉलेज की दहलीज तक भी नहीं पहुंचीं हैं तो मीराबाई चानू जैसी एथलीट भी, जो संन्यास के मुहाने पर खड़ीं हैं.
एशियन गेम्स में मिले 21 में से 11 गोल्ड महिलाओं ने दिलाए.
‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के?’… अब ये सिर्फ फिल्मी डायलॉग नहीं है बल्कि एशियन गेम्स 2026 के बाद भारतीय दल की सच्चाई है. भारत ने जापान के आईची-नागोया में हुए एशियाई खेलों में 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल जीते, इन 21 गोल्ड मेडल्स में से 11 महिलाओं ने जीते, जबकि तीन गोल्ड मिक्स्ड इवेंट से आए. यानी भारत के कुल गोल्ड मेडल का आधे से ज्यादा हिस्सा महिलाओं के नाम रहा. भारत की बेटियों ने सिर्फ पदक नहीं जीते बल्कि यह भी साबित किया कि महिलाओं की हिस्सेदारी अब आंकड़ों से आगे बढ़कर दबदबे में बदल रही है.
- 495 खिलाड़ियों के भारतीय जत्थे में 234 महिलाएं थीं
- इस मर्तबा 21 गोल्ड में से 11 महिलाओं (मिक्स्ड समेत) ने जिताया
- पिछली बार नौ महिला, 4 मिक्स्ड और 15 मेंस इवेंट से आए
- भारत ने कुल 85 मेडल जीते (21 गोल्ड, 27 सिल्वर, ब्रॉन्ज)
जेन-जी प्लेयर्स ने दिखाया दम
17 साल की कुमकुम महोद ने तीरंदाजी में कोरिया की ओलंपिक चैंपियन ओह ये-जिन को हराकर बड़ा उलटफेर किया. कुमकुम अकेली नहीं थीं. युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है. गोल्फ में प्रनवी उर्स ने चीन की वर्ल्ड नंबर-6 यिन रुओनिंग को हराकर ऐतिहासिक गोल्ड जीता. यही इस एशियन गेम्स की महिला कहानियों की खासियत रही. बड़े नामों से डरने के बजाय हमारी प्लेयर्स ने बड़े नामों को हराया.
अनाहत सिंह ने एशियन गेम्स में जीता सिल्वर
अनुभवी खिलड़ियों का भी परचम
ये एशियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों तक ही सीमित नहीं थे बल्कि मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव को अंजाम तक पहुंचाया. वेटलिफ्टिंग में मीराबाई ने सिल्वर मेडल के साथ भारत के 28 साल लंबे पदक इंतजार को खत्म किया जबकि बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं. परवीन हुड्डा दो साल के बैन के बावजूद ‘सुनहरी वापसी’ में कामयाब रहीं.
नीरू ढांडा अंसी सोजान ने बीमारी को पीछे छोड़ा
कई पदक तो ऐसे आए, जिनके पीछे सिर्फ तकनीक और ट्रेनिंग नहीं बल्कि बीमारियों और हालातों से लड़ने की भी कहानियां रहीं. ट्रैप शूटिंग में गोल्ड जीतने वालीं नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स से ठीक पहले इन्फ्लुएंजा-बी के कारण अस्पताल में भर्ती हुई थीं. लॉन्ग जंप में सिल्वर जीतने वाली अंसी सोजान पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से जूझने के बावजूद पोडियम तक पहुंचीं. 36 साल की सुचिका तारियाल ने MMA में ब्रॉन्ज जीतकर एक अलग तरह की कहानी लिखी. बचपन में छेड़खानी का शिकार हुई सुचिका ने साबित किया कि इस उम्र में भी मेडल पाना संभव है.
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रे…
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