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एशियन गेम्स 2026 के 15वें दिन अमन सहरावत ने कुश्ती में भारत को 20वां गोल्ड मेडल दिलाया है. फाइनल में अमन का सामना नॉर्थ कोरिया के चोंग सोंग से हुआ था. अमन ने मैच में शुरुआत दमदार की थी, लेकिन दूसरे हाफ में उन्होंने अपनी पकड़ खो दी. हालांकि, अंतिम क्षणों में अमन ने दमदार वापसी करते हुए 11-7 से जीत हासिल की.
अमन सहरावत ने कुश्ती में जीता गोल्ड मेडल
नई दिल्ली: एशियन गेम्स के 15वें दिन भारत के लिए पहलवान अमन सहरावत ने 20वां गोल्ड मेडल जीता. अमन ने 57 किलोग्राम वर्ग के कड़े मुकाबले वाले फाइनल में उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 11-7 से हराकर गोल्ड पर कब्जा किया. 23 साल के भारतीय पहलवान ने हांगझोउ एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. उन्होंने इस बार शानदार रणनीति का प्रदर्शन करते हुए हान को मात दी और अपने पदक का रंग बदलते हुए पोडियम के शीर्ष स्थान पर पहुंचने में सफल रहे.
अमन ने इससे पहले सेमीफाइनल में ताजिकिस्तान के ऐयाल बेलोलियुब्स्की को 14-8 से हराकर पहली बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद जगाई थी. पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत के सबसे कम उम्र के ओलंपिक पदक विजेता बने सहरावत फाइनल में लगातार नियंत्रण में रहे. हान ने भारतीय पहलवान को हराने के लिए हर संभव दांव आजमाया और एक समय 7-6 की बढ़त भी हासिल कर ली थी लेकिन अमन ने फिर अच्छी वापसी की. ऐसे में आइए जानते हैं कौन भारत को 20वां गोल्ड दिलाने वाले अमन सहरावत.
कौन है अमन सहरावत?
अमन सहरावत भारत के एक उभरते हुए फ्रीस्टाइल पहलवान हैं, जो हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहड़ गांव से आते हैं. अमन 57 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं. अमन का बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा. जब वे मात्र 11 साल के थे उनकी मां का निधन हो गया और इसके कुछ ही महीनों के भीतर उनके पिता का भी साया सिर से उठ गया.
माता-पिता के गुजरने के बाद अमन के लिए उनकी बहन और चाचा सहारा बने. चाचा ने उन्हें छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग कराई. अमन ने भी पूरी लगन के साथ मेहनत की और पेरिस ओलंपिक 2024 में 57 किग्रा कुश्ती स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इस तरह अमन ओलंपिक मेडल जीतने वाले भारत के सबसे युवा एथलीट बन थे. अमन ने इस मामले में पीवी सिंधु का रिकॉर्ड तोड़ा था.
माता-पिता के गुजरने पर चाचा और बहन ने दिया साथ
अमन के इस मुकाम तक पहुंचने में उनके परिवार का योगदान बहुत ज्यादा रहा. माता-पिता के गुजरने के बाद उनके चाचा सुधीर सहरावत ने उन्हें और उनकी छोटी बहन पूजा को सहारा दिया. चाचा ने न सिर्फ दोनों बच्चों की देखभाल की, बल्कि अमन के कुश्ती के सपने को जिंदा रखते हुए उन्हें दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग के साथ खाने-पीने की व्यवस्था की. वहीं उनकी बहन पूजा उनके जीवन में सबसे बड़ी भावनात्मक ताकत बनकर उभरीं, जिनके स्नेह और समर्थन ने अमन को हर दुख से उबरकर देश के लिए पदक जीतने का हौसला दिया.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. वर्तमान में वह नेटवर्क 18 समूह के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हैं और हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में अपनी…
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