नई दिल्ली. भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है. एशियाई खेलों में भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने अपने बेहतरीन और साहसिक प्रदर्शन के दम पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. खिताबी मुकाबले में भारत ने विश्व चैंपियन और तीरंदाजी की महाशक्ति माने जाने वाली दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से शिकस्त देकर पहली बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई है और हर तरफ से भारतीय तीरंदाजों पर बधाइयों की बरसात हो रही है.
भारत की इस विजेता रिकर्व टीम में देश की प्रतिभाशाली तीरंदाज अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड़ शामिल थीं. इन तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शुमार दक्षिण कोरियाई टीम को दबाव में ला दिया. दक्षिण कोरियाई टीम के पास ओलंपिक खेलों का 10 बार का चैंपियनशिप अनुभव था, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने किसी भी प्रकार के दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. पूरे मुकाबले के दौरान भारतीय टीम का आत्मविश्वास और आपसी तालमेल देखते ही बनता था.
मुकाबले का रोमांचक उतार-चढ़ाव
यह खिताबी मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेला गया. मैदान पर तेज हवाएं चल रही थीं, जिसके कारण तीरंदाजों के लिए अपने निशाने को सटीक रखना बेहद कठिन हो रहा था. इसके बावजूद दोनों टीमों ने शुरुआत से ही एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी.
पहला और दूसरा सेट: मुकाबले के शुरुआती दोनों सेट बेहद रोमांचक रहे और दोनों बराबरी पर छूटे. पहले सेट में भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ने एक समान 54-54 अंक जुटाए. इसके बाद दूसरे सेट में भी दोनों टीमों ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए 56-56 अंक हासिल किए. इस तरह शुरुआती संघर्ष के बाद दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा.
तीसरे सेट में भारत की निर्णायक बढ़त: मैच का टर्निंग पॉइंट तीसरा सेट साबित हुआ. इस सेट में विश्व चैंपियन दक्षिण कोरियाई टीम की तीरंदाज कांग चेयंग, ओ येजिन और ली युनजी दबाव में नजर आईं और लड़खड़ा गईं. कोरियाई तीरंदाजों ने लगातार तीन बार आठ-आठ अंक ही हासिल किए और वे कुल मिलकर सिर्फ 52 अंक ही जुटा सकीं. दूसरी ओर, भारतीय तीरंदाजों ने मौके का पूरा फायदा उठाया और शानदार निशानेबाजी करते हुए 55 अंक बटोरे. इस सेट को जीतकर भारत ने मुकाबले में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली.
चौथा और अंतिम सेट: चौथे और निर्णायक सेट में दक्षिण कोरियाई टीम ने वापसी की पूरी कोशिश की और 54 अंक बनाए. भारत की तरफ से कीर्ति शर्मा ने शुरुआत में आठ अंक हासिल किए, जिसे बाद में तकनीकी समीक्षा के बाद निर्णायक रूप से नौ अंक में बदल दिया गया. इससे भारत का कुल स्कोर भी 54 हो गया और यह सेट बराबरी पर छूटा. इस रोमांचक नतीजे के साथ ही भारत ने 5-3 से मैच अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमा लिया.
सेमीफाइनल में चीन को दी थी मात
इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. फाइनल में पहुंचने से पहले भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल मुकाबले में मेजबान और मजबूत चीन की टीम को 5-1 के बड़े अंतर से मात दी थी. इस शानदार जीत के साथ ही भारतीय टीम ने पहली बार एशियाई खेलों के फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी और अंततः खिताबी मुकाबले में भी अपना परचम लहरा दिया.
भारतीय तीरंदाजी के लिए मील का पत्थर
एशियाई खेलों में रिकर्व वर्ग में दक्षिण कोरिया का दबदबा हमेशा से बेहद मजबूत रहा है. ऐसे में उन्हें हराकर स्वर्ण पदक जीतना भारतीय तीरंदाजी इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है. अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड़ की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि भारतीय खिलाड़ियों को सही मंच और हौसला मिले, तो वे दुनिया के किसी भी कोने के खिलाड़ियों को मात दे सकते हैं. इस ऐतिहासिक प्रदर्शन से देश की आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी और खेल के क्षेत्र में भारत का मान पूरी दुनिया में और ऊंचा हुआ है.

