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Gonda Latest News: गोंडा में करीब 30 साल पुराने नजूल जमीन विवाद में बड़ा मोड़ आया है. मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की ओर से पुराने मामलों की समीक्षा के बीच वादी दयानंद मिश्र ने कोर्ट में शपथपत्र देकर आगे मुकदमे की पैरवी न करने की बात कही और विवादित जमीन से अपना कब्जा भी हटा लिया.
IAS दुर्गा शक्ति नागपाल की सख्ती का असर
गोंडा: यूपी के गोंडा में करीब 30 साल पुराने नजूल जमीन विवाद में बड़ा बदलाव सामने आया है. मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की ओर से पुराने मामलों की समीक्षा के बाद विवादित जमीन पर कब्जे में रह रहे वादी दयानंद मिश्र ने अब अदालत में शपथपत्र देकर आगे मुकदमे की पैरवी न करने की बात कही है. इसके साथ ही उन्होंने मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया. मामला गोंडा के सिविल लाइंस इलाके में मंडलायुक्त कार्यालय और भवन के लिए आरक्षित नजूल जमीन से जुड़ा है.
यह विवाद वर्ष 1997 से अदालत में चल रहा था. मामला ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगर पालिका परिषद गोंडा से जुड़ा है. विवादित जमीन के कुछ हिस्सों पर ज्योति विद्या मंदिर नाम से स्कूल चलाए जाने की बात सामने आई थी. प्रशासन की जांच में मौके पर स्कूल में छात्र और शिक्षक नहीं मिलने की जानकारी भी सामने आई.
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मई 2026 में पद संभालने के बाद सरकारी जमीनों से जुड़े पुराने मामलों की समीक्षा कराई. इसी दौरान यह मामला भी सामने आया. प्रशासन की ओर से जमीन के रिकॉर्ड और कोर्ट में चल रहे मामले की स्थिति की समीक्षा की गई और सरकारी पक्ष को मजबूती से रखने के निर्देश दिए गए.
हाईकोर्ट में फोन कॉल को लेकर उठा था विवाद
इसी मामले की सुनवाई के दौरान मंडलायुक्त और गोंडा की सिविल जज शबीना खान के बीच फोन पर हुई बातचीत को लेकर विवाद सामने आया था. सिविल जज ने जिला जज को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि फोन पर मुकदमे को लेकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश हुई. दूसरी तरफ मंडलायुक्त ने कहा था कि फोन केवल उनकी छुट्टी की अवधि की जानकारी लेने के लिए किया गया था और मुकदमे के गुण-दोष पर बातचीत नहीं हुई.
21 अगस्त 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने के प्रयास का संकेत देती है. कोर्ट ने मामले को आपराधिक अवमानना पर विचार करने वाली उचित पीठ के सामने रखने के लिए जरूरी निर्देश लेने को कहा था. हालांकि, हाईकोर्ट ने उस समय किसी को आपराधिक अवमानना का दोषी नहीं ठहराया था.
अब इसी पुराने जमीन विवाद में वादी की ओर से मुकदमे से पीछे हटने और जमीन से कब्जा हटाने के बाद मामले की आगे की तस्वीर बदल गई है. प्रशासन का कहना है कि अब इन नजूल भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए इन्हें निर्धारित सरकारी काम में इस्तेमाल करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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