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shot putter manpreet kaur story: ‘बहू अंधेरे में ही निकल जाती थी स्टेडियम’, भारत की मनप्रीत कौर ने जीता ब्रांज मेडल, सास ने बताई सफलता की कहानी

Admin by Admin
September 27, 2026
in खेल
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shot putter manpreet kaur story: ‘बहू अंधेरे में ही निकल जाती थी स्टेडियम’, भारत की मनप्रीत कौर ने जीता ब्रांज मेडल, सास ने बताई सफलता की कहानी


अंबाला: कुछ हार ऐसी होती हैं जो खिलाड़ी को तोड़ने के बजाय उसे और मजबूत बना देती हैं. कुछ ऐसा ही हुआ अंबाला से जुड़ी 36 वर्षीय शॉटपुट खिलाड़ी मनप्रीत कौर के साथ, क्योंकि जुलाई में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में महज कुछ अंतर से कांस्य पदक से चूककर चौथे स्थान पर रहने वाली मनप्रीत ने निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. करीब दो महीने बाद उन्होंने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में 17.17 मीटर का थ्रो करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया है. यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक है.

बता दें कि मनप्रीत ने महिला शॉटपुट के फाइनल में अपने चौथे प्रयास में 17.17 मीटर का थ्रो किया, जो उन्हें पोडियम तक ले गया. चीन की सोंग जियायुआन ने 19.40 मीटर के साथ स्वर्ण और चीन की झांग लिनरू ने 18.14 मीटर के साथ रजत पदक जीता. मनप्रीत की इस उपलब्धि के बाद अंबाला से लेकर परिवार तक खुशी का माहौल है.

अंधेरे में ही निकल जाती थीं स्टेडियम
मनप्रीत कौर का जन्म वैसे तो पंजाब के पटियाला जिले में हुआ था. लेकिन 2004 के बाद से वह अपने पति के साथ अंबाला में रहने लगी थीं और अब नौकरी के कारण दोबारा पटियाला में कुछ सालों से रह रही हैं. दूसरी तरफ परिजन अब उस मेहनत को याद कर रहे हैं, जब मनप्रीत परिवार की जिम्मेदारियों के साथ सुबह अंधेरे में ही अंबाला के स्टेडियम के लिए निकल जाया करती थीं.

बहू पर गर्व जता रहीं सास
वहीं मनप्रीत की बुआ सास चरणजीत कौर ने लोकल 18 को बताया कि बहू की इस उपलब्धि पर उन्हें बेहद खुशी और गर्व है. उन्होंने कहा कि मनप्रीत पहले भी कई पदक जीतकर परिवार का नाम रोशन कर चुकी हैं, लेकिन एशियन गेम्स में यह पदक उनके लिए खास है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में अंबाला में रहते हुए मनप्रीत रोजाना सुबह करीब 4 बजे प्रैक्टिस के लिए निकल जाती थीं. घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के बाद शाम को भी कई घंटे मैदान में मेहनत करती थीं.

पति भी शॉटपुट में नेशनल मेडलिस्ट
वहीं चरणजीत कौर ने बताया कि कुछ साल पहले रेलवे की नौकरी के चलते मनप्रीत अपने पति करमजीत सिंह के साथ पटियाला चली गई थीं और वह दोनों रेलवे में नौकरी करते हैं. उनकी 15 वर्षीय बेटी जश्नूर कौर भी है. खास बात यह है कि मनप्रीत के पति करमजीत सिंह खुद भी शॉटपुट में नेशनल मेडलिस्ट रह चुके हैं और अब पत्नी के कोच की भूमिका निभा रहे हैं. नौकरी के साथ मैदान पर पत्नी की तैयारी करवाना भी उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है.

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वही मनप्रीत की जीत की खबर मिलने के बाद लोकल 18 के सामने उनके पति करमजीत सिंह ने अपनी बुआ और फूफा से फोन पर बात की और बातचीत के दौरान परिवार के बीच खुशी साफ नजर आई. बुआ ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि मनप्रीत ने बेटी बनकर परिवार का नाम रोशन किया है. परिवार अब गुरुद्वारा साहिब जाकर उनकी सफलता के लिए अरदास करने और मोहल्ले में मिठाई बांटकर खुशी मनाने की तैयारी में है.

नौकरी के कारण पटियाला में रह रहे पति-पत्नी
ससुर मनजीत सिंह ने भी बताया कि उनका बेटा करमजीत खुद खिलाड़ी रहा है और बीमारी के कारण उसे खेल से कुछ दूरी बनानी पड़ी, लेकिन उसने पत्नी की प्रैक्टिस कभी नहीं रुकने दी. उन्होंने कहा कि दोनों पति-पत्नी रेलवे की नौकरी के साथ खेल को भी आगे बढ़ा रहे हैं. कई साल अंबाला में रहने के बाद अब दोनों नौकरी के सिलसिले में पटियाला में हैं. जब दोनों वापस अंबाला आएंगे तो परिवार ढोल बजाकर उनका स्वागत करेगा.

उन्होंने कहा कि मनप्रीत के करियर की राह हमेशा आसान नहीं रहा, क्योंकि 2017 में डोपिंग टेस्ट में असफल होने के बाद उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा था. लंबे समय तक मैदान से दूर रहने के बावजूद उन्होंने वापसी की और खुद को दोबारा साबित किया. साल 2023 में एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना उनकी वापसी का बड़ा पड़ाव रहा.

अगला 18 मीटर थ्रो है अगला टारगेट
सात बार की नेशनल चैंपियन मनप्रीत का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 18.06 मीटर है और कॉमनवेल्थ में 17.49 मीटर के साथ चौथे स्थान की निराशा के बाद मनप्रीत ने एशियन गेम्स में 17.17 मीटर का थ्रो कर साबित किया कि अनुभव और लगातार मेहनत का कोई विकल्प नहीं है. अब उनका अगला लक्ष्य 18 मीटर के आसपास थ्रो करना है और परिवार के लिए यह सिर्फ एक कांस्य पदक नहीं, बल्कि उन वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उम्मीदों का नतीजा है, जिनकी शुरुआत कभी अंबाला की सुबह की ठंडी सड़कों से हुई थी.



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