नई दिल्ली. सीमा कुमारी कौन हैं? यह सवाल आज हर उस खेल प्रेमी की जुबां पर है, जिसने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स का शानदार प्रदर्शन देखा है. हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में जन्मीं सीमा कुमारी आज भारतीय लंबी दूरी की दौड़ का एक बहुत बड़ा नाम बन चुकी हैं. वह मुख्य रूप से 5000 मीटर और 10,000 मीटर स्पर्धाओं की विशेषज्ञ हैं. पहाड़ों के कठिन रास्तों से शुरू हुआ उनका यह सफर आज इंटरनेशनल स्टेज के सिंथेटिक ट्रैक तक पहुंच गया है, जहां उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और लगातार सुधरते प्रदर्शन के दम पर पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. उनका यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे वर्षों की अथक मेहनत, पसीना और कभी हार न मानने का जज्बा शामिल है.
एशियन गेम्स 2026 में गुरुवार का दिन भारतीय खेल इतिहास में एक बेहद खास दिन बन गया. इसी दिन सीमा कुमारी (Seema Kumari) ने मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में अपना ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता. यह पदक कई मायनों में अहम है. सबसे बड़ी बात यह है कि सीमा के इस पदक ने इन खेलों में भारत के लिए एथलेटिक्स स्पर्धा का बहुप्रतीक्षित खाता खोला. इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं की 10,000 मीटर रेस में भारत के 16 साल के लंबे और सूखे इंतजार को आखिरकार खत्म कर दिया.
ट्रैक पर अचूक रणनीति और दमदार शुरुआत
रेस के आंकड़ों और ट्रैक पर सीमा की रणनीति को देखें, तो यह किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं था. मिजुहो पार्क में जब रेस शुरू हुई, तो सीमा ने बेहद तेज शुरुआत की. वह शुरुआत से ही रेस को लीड करने वाले धावकों के मुख्य समूह का हिस्सा बनी रहीं. अपनी शानदार लय दिखाते हुए उन्होंने शुरुआती 2000 मीटर तक पूरी फील्ड का नेतृत्व किया. इस दौरान उनकी गति देखने लायक थी, उन्होंने पहला किलोमीटर महज 3 मिनट और 18.12 सेकंड में पूरा कर लिया. इसके बाद जब 2000 मीटर का मार्कर आया, तब तक घड़ी में 6 मिनट और 36.13 सेकंड का समय हो चुका था.
कठिन चुनौती और शानदार वापसी
लेकिन 10,000 मीटर की रेस शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती का भी खेल है. बीच के चरणों में जब बाकी धावकों ने रेस की गति बढ़ाई, तो सीमा थोड़ी पिछड़ गईं और कुछ समय के लिए चौथे स्थान पर खिसक गईं. यह वह पल था जहां कोई भी एथलीट अपना मानसिक संतुलन खो सकता था, लेकिन सीमा ने अपनी एकाग्रता नहीं खोई. वह आगे चल रहे धावकों के बिल्कुल करीब बनी रहीं और पोडियम फिनिश की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा. जब रेस में केवल 1000 मीटर का फासला बाकी रह गया था, तब सीमा ने अपनी बची हुई पूरी ताकत झोंक दी. उन्होंने शानदार वापसी करते हुए तीसरे स्थान पर दोबारा कब्जा जमा लिया. अंतिम पलों के भारी दबाव को झेलते हुए उन्होंने अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और 32 मिनट 50.05 सेकंड का बेहतरीन समय निकालते हुए फिनिश लाइन पार की.
प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीमा का दबदबा
इस बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा में बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 32 मिनट 39.18 सेकंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. वहीं, जापान की नोजोमी तनाका ने 32 मिनट 41.54 सेकंड के साथ रजत पदक पर कब्जा जमाया. कजाकिस्तान की डेजी जेपकेमेई 33 मिनट 03.21 सेकंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहीं. दिलचस्प बात यह है कि सीमा ने डेजी को 13 सेकंड से भी अधिक के बड़े अंतर से पीछे छोड़ा, जो ट्रैक पर भारतीय धाविका के दबदबे को साबित करता है.
16 साल बाद एलीट क्लब में एंट्री
सीमा का यह कांस्य पदक उन्हें भारतीय एथलेटिक्स के एक बेहद विशिष्ट और एलीट क्लब में शामिल करता है. उनसे पहले साल 2010 के एशियन गेम्स में भारत की प्रीजा श्रीधरन ने इसी स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था, जबकि कविता राउत ने रजत पदक अपने नाम किया था. अब पूरे 16 साल बाद सीमा कुमारी इस इवेंट में एशियन गेम्स के पोडियम पर खड़ी होने वाली तीसरी भारतीय महिला बन गई हैं, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.
शानदार फॉर्म और टूटते रिकॉर्ड्स
एशियन गेम्स में मिली यह कामयाबी कोई तुक्का नहीं है. सीमा 2026 के पूरे सीजन में बेहतरीन और आक्रामक फॉर्म में रही हैं. इसी साल मार्च में कैलिफोर्निया में आयोजित ‘द टेन’ प्रतियोगिता में उन्होंने 10,000 मीटर स्पर्धा में 32 मिनट 02.43 सेकंड का अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय (पर्सनल बेस्ट) निकाला था. इसके ठीक एक महीने बाद अप्रैल में, उन्होंने 5000 मीटर की रेस में भी शानदार सुधार करते हुए 15 मिनट 16.20 सेकंड का अपना नया पर्सनल बेस्ट दर्ज किया था.
