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Tomato Farming : दोगुनी हो जाएगी पैदावार, जानिए टमाटर की फसल में कब और कितनी डालें खाद?

Admin by Admin
September 19, 2026
in उत्तर प्रदेश
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Tomato Farming : दोगुनी हो जाएगी पैदावार, जानिए टमाटर की फसल में कब और कितनी डालें खाद?


होमताजा खबरकृषि

दोगुनी हो जाएगी पैदावार, जानिए टमाटर की फसल में कब और कितनी डालें खाद?

Last Updated:September 19, 2026, 18:43 IST

Tomato Farming Tips : टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए केवल सिंचाई और देखभाल ही काफी नहीं है. टमाटर की फसल को बढ़वार से लेकर फल आने तक अलग-अलग समय पर अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है. रायबरेली के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि प्रति एकड़ खेत में 4 से 5 मीट्रिक टन सड़ी हुई गोबर की खाद या 2 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. पौधों की रोपाई के 20 से 25 दिन बाद यूरिया 10 से 15 किलो प्रति एकड़ देनी चाहिए. इससे पौधों की ग्रोथ तेज होती है. पत्तियां हरी-भरी रहती हैं.

रायबरेली. टमाटर की खेती देश के लगभग हर राज्य में की जाती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए केवल सिंचाई और देखभाल ही काफी नहीं है. सही खाद का चयन और उसका सही समय पर उपयोग करना भी बेहद जरूरी है. टमाटर की फसल को बढ़वार से लेकर फल आने तक अलग-अलग समय पर अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है. ऐसे में जरूरी है कि किसान कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार की अपनी फसल में उचित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करें. रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि टमाटर की फसल को जैविक और रासायनिक दोनों तरह की खादों से पोषण देना चाहिए. खेत तैयार करते समय सबसे पहले गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कंपोस्ट डालना बेहद फायदेमंद है. प्रति एकड़ खेत में 4 से 5 मीट्रिक टन सड़ी हुई गोबर की खाद या 2 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधे की जड़ों को मजबूती मिलती है.

कैसे करें खेत तैयार

शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि खेत की तैयारी करते समय डीएपी (DAP) 25 से 30 किलो प्रति बीघा डालना चाहिए, ताकि शुरुआती अवस्था में पौधों को नाइट्रोजन और फास्फोरस की पर्याप्त मात्रा मिल सके. पौधों की रोपाई के 20 से 25 दिन बाद यूरिया 10 से 15 किलो प्रति एकड़ देनी चाहिए. इससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और पत्तियां हरी-भरी रहती हैं.

ये विकल्प भी आपके पास

जब पौधों में फूल आने लगें, तब पोटाश की मात्रा बढ़ानी जरूरी होती है. इसके लिए म्यूरिएट ऑफ पोटाश 10 से 15 किलो प्रति एकड़ देना चाहिए. इससे फूल झड़ने की समस्या कम होती है और फलों का आकार व रंग बेहतर बनता है. इसके साथ ही बोरॉन और जिंक सल्फेट का छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करने से पौधों में पोषक तत्वों की कमी नहीं रहती है. किसान अगर रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो वह दूसरे विकल्प के तौर पर जीवामृत, पंचगव्य, ह्यूमिक एसिड और समुद्री शैवाल घोल का प्रयोग कर सकते हैं. ये न केवल मिट्टी की सेहत सुधारते हैं, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बढ़ाते हैं.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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Location :

Rae Bareli,Uttar Pradesh

First Published :

September 19, 2026, 18:43 IST



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