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मिर्जापुर में करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया कूड़ा निस्तारण केंद्र पांच साल बाद भी कचरे का निस्तारण नहीं कर सका है. नगर पालिका क्षेत्र से रोजाना करीब 60 टन कूड़ा यहां पहुंचता है, जिससे करीब आठ बीघे क्षेत्र में कचरे का अंबार लग गया है. प्लांट की मशीनें भी कचरे से ढक गई हैं और आसपास के लोग बदबू व धुएं से परेशान हैं.
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में करीब 6 करोड रुपए की लागत से बनाया गया कूड़ा निस्तारण केंद्र महज प्रदर्शनी बनकर रह गया. केंद्र का निर्माण होने के बाद आज तक एक टन कूड़े का निस्तारण नहीं किया गया. कूड़े के निस्तारण को लेकर सेंटर बनने के बाद तमाम बातें कही गई थी. परियोजना में 6 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च करके मशीन लगाई गई थी. कूड़े को अलग-अलग करने के बाद इसे निस्तारण किया जाना था, लेकिन आज तक कूड़े का निस्तारण नहीं हो सका यही वजह है कि अब दिल्ली के गाजीपुर की तरह मिर्जापुर में भी कूड़े का पहाड़ लग गया है
मिर्ज़ापुर नगर पालिका क्षेत्र से प्रतिदिन 60 टन कूड़ा निकलता है. इस कूड़े को ग्रामीण क्षेत्र टाड में लाया जाता है. टाड में कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया गया था. कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए जाने के बाद यहां पर कूड़े को रिसाइकल किया जाना था. हालांकि, प्लांट बनने के बाद या शुरू नहीं हुआ, लेकिन कचरे का प्लांट पर आना शुरू हो गया. यही वजह है कि पिछले 5 वर्षों से लगातार यहां पर कचडा आ रहा है, लेकिन कचरे का निस्तारण नहीं किया जा रहा है. जिस वजह से अब दिल्ली के गाजीपुर की तरह यहां पर भी पूरे का पहाड़ बनता हुआ नजर आ रहा है.
नहीं चल सकी मशीन
नगर पालिका के द्वारा कूड़े के निस्तारण को लेकर दोबारा संयंत्र लगाने को लेकर परियोजना पास किया गया था, लेकिन वह भी परियोजना पूरी तरीके से फेल नजर आ रहा है. दोनों प्लांट अब कूड़े से पूरी तरीके से ढक गए हैं. आवागमन के लिए रास्ता तक शेष नहीं है. करीब आठ बीघा में सिर्फ कूड़ा ही कूड़ा नजर आ रहा है. आसपास के लोगों ने पूरे की बदबू की वजह से रहना छोड़ दिया है, जहां कुछ दुकानें भी अब पूरी तरीके से बंद हो चुकी हैं.
होगी जांच
सबसे खराब स्थिति कूड़े के देर में आग लगने के बाद होती है. आग लगने के बाद तेज धुंआ निकलता है, जिसके बाद सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. नपाध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी का कहना है कि कूड़े के निस्तारण को लेकर केंद्र बनाया गया है, जो कमियां होगी उसे दूर किया जाएगा. जो खामियां होगी उसकी जांच भी कराई जाएगी.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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