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Ayush Malik Conversion Case: शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आयुष मलिक को अपनी इच्छा के मुताबिक धर्म मानने, कहीं भी आने-जाने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की आजादी दी है.
आयुष की बात सुनकर कोर्ट ने हटाई पाबंदी.
शामली: जिले के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को अहम आदेश दिया. आयुष को उसके दोस्त मोहम्मद सुल्तान की ओर से आयुष को कोर्ट में पेश करने की मांग वाली याचिका के बाद कोर्ट में पेश किया गया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आयुष से अलग से बात की और उसके पिता देवराज मलिक का पक्ष भी सुना. आयुष ने कोर्ट को बताया कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था. उसने यह भी कहा कि वह अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने में सक्षम है और चांदनी कुरैशी के साथ रहना चाहता है. वहीं, पिता देवराज मलिक ने कोर्ट के सामने कहा कि उनका बेटा बहकावे में आया है और वह उसकी भलाई को देखते हुए धर्म परिवर्तन और शादी के फैसले के खिलाफ हैं.
मामला मूल रूप से शामली के शहर कोतवाली क्षेत्र का है. आयुष के पिता ने जून 2026 में पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उनके बेटे का ब्रेनवॉश कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया. शिकायत के आधार पर पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था. पुलिस ने मामले में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था. बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी.
इसके बाद आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान ने हाईकोर्ट में आयुष को कोर्ट में पेश कराने के लिए याचिका दी. याचिका में आरोप लगाया गया कि आयुष को उसके पिता ने घर में अवैध रूप से रोककर रखा है. इस पर हाईकोर्ट ने आयुष को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था. 16 सितंबर को आयुष को अदालत के सामने पेश किया गया.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने व्यक्तिगत आजादी और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, एक बालिग व्यक्ति अपनी पसंद के धर्म को मानने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का फैसला कर सकता है. परिवार की असहमति अकेले किसी बालिग व्यक्ति की निजी आजादी को रोकने का आधार नहीं हो सकती. हाईकोर्ट ने आयुष पर लगी पाबंदियां हटाते हुए उसे अपनी इच्छा के मुताबिक रहने और आने-जाने की स्वतंत्रता दी. इसके साथ ही आयुष को कोर्ट में पेश कराने की याचिका का निपटारा कर दिया गया.
पुलिस ने भी जारी किया स्पष्टीकरण
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शामली पुलिस की ओर से भी स्पष्टीकरण दिया गया. पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को गलत बताया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है. पुलिस के मुताबिक, आयुष को कोर्ट के आदेश पर ही अदालत में पेश किया गया था.पुलिस का कहना है कि इस मामले में दर्ज FIR पर हाईकोर्ट की ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई है. मामले की जांच जारी है और पुलिस उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है. इस मामले में पहले हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को आयुष को 16 सितंबर को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था. याचिका में उसके पिता पर अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया था.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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