वाराणसी: यूपी की वाराणसी में बढ़ते ट्रैफिक और जाम से राहत दिलाने के लिए एक बड़ा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का प्लान है. करीब 10,998 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर 43.218 किलोमीटर लंबा होगा. इसका मकसद शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करना और लोगों को एक तेज वैकल्पिक रास्ता देना है.
यह कॉरिडोर NH-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा वरुणा नदी के किनारे शहर के बीच से गुजरेगा. यानी पुराने और घने शहर में जमीन पर सड़क चौड़ी करने के बजाय ऊपर से एक नया रास्ता तैयार किया जाएगा.
40 मिनट का सफर करीब 20 मिनट में
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यात्रा के समय में कमी के तौर पर सामने आएगा. योजना के मुताबिक NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में अभी करीब 40 मिनट लगते हैं. कॉरिडोर बनने के बाद यह समय करीब 20 मिनट रह सकता है.
इसी तरह वाराणसी जंक्शन से लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक का सफर भी करीब 20 मिनट में पूरा होने का अनुमान है. अभी इस दूरी को तय करने में करीब एक घंटे तक लग सकता है. कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रखने की योजना है. इससे शहर के भीतर आने-जाने वाले लोगों के साथ माल ढुलाई वाले वाहनों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
43.218 KM का होगा पूरा कॉरिडोर
परियोजना के तहत मुख्य रूप से 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. इसमें सिर्फ मुख्य सड़क ही नहीं होगी, बल्कि फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड भी बनाए जाएंगे. इसके अलावा प्रोजेक्ट में एक खास केबल-स्टेड ब्रिज और एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज भी शामिल है.निर्माण से जुड़े काम के लिए 4,565.33 करोड़ रुपये और जमीन अधिग्रहण के लिए 934.91 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है.
कैंट से एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन तक कनेक्टिविटी होगी आसान
कॉरिडोर का असर वाराणसी के कई अहम हिस्सों पर पड़ने की उम्मीद है. वाराणसी एयरपोर्ट, वाराणसी कैंट, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, काशी रेलवे स्टेशन और दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन जैसे प्रमुख स्थान इससे बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे. रामनगर पोर्ट और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होने की उम्मीद है. इससे शहर में आने वाले यात्रियों के साथ कारोबार और माल ढुलाई से जुड़े वाहनों को भी फायदा हो सकता है.
पुराने शहर में सड़क चौड़ी करने की जरूरत होगी कम
वाराणसी का पुराना शहर काफी घना है. यहां मौजूदा सड़कों को चौड़ा करने के लिए बड़ी मात्रा में जमीन की जरूरत पड़ सकती है. साथ ही पुराने इलाकों में ऐसा करना आसान भी नहीं है. ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर को एक अलग रास्ते के तौर पर तैयार करने की योजना है. इससे लंबी दूरी के वाहनों को शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है. लूप, रैंप और सर्विस रोड के जरिए स्थानीय ट्रैफिक और दूसरे इलाकों से आने-जाने वाले वाहनों को अलग-अलग रास्ता देने की कोशिश होगी.
वाराणसी के सबसे भीड़ वाले इलाकों को राहत
वाराणसी जंक्शन, फुलवरिया और चौकाघाट जैसे इलाकों में रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं. स्थानीय लोगों के अलावा रेलवे स्टेशन, बाजार और दूसरे हिस्सों में जाने वाला ट्रैफिक भी इन्हीं रास्तों पर आता है. नया कॉरिडोर बनने के बाद इस ट्रैफिक का एक हिस्सा दूसरे रास्ते पर जा सकेगा. इससे इन इलाकों में जाम का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.
श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी फायदा
वाराणसी देश के बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्रों में शामिल है. शहर में पूरे साल श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही रहती है. त्योहारों और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान ट्रैफिक और बढ़ जाता है. वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी इसे लगातार आने वाले पर्यटकों का प्रमुख केंद्र बनाती है. ऐसे में शहर में एक अतिरिक्त हाई-कैपेसिटी रास्ता मिलने से ट्रैफिक को अलग-अलग हिस्सों में बांटने में मदद मिल सकती है. इसका फायदा काशी विश्वनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और दूसरे प्रमुख इलाकों तक आने-जाने वाले लोगों को भी मिल सकता है.
सिर्फ ट्रैफिक नहीं, कारोबार को भी फायदा
इस प्रोजेक्ट को वाराणसी की कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के लिए भी अहम माना जा रहा है. हाईवे, रेलवे और माल ढुलाई के नेटवर्क को बेहतर तरीके से जोड़ने से सामान की आवाजाही आसान हो सकती है. कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और दूसरे माल को वाराणसी और आसपास के इलाकों तक पहुंचाने में समय कम लग सकता है. इसका फायदा पूर्वी उत्तर प्रदेश के कारोबार को भी मिलने की उम्मीद है.
वाराणसी को मिलेगी नई ट्रांसपोर्ट रीढ़
कुल मिलाकर 10,998 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक सड़क बनाने की योजना नहीं है. इसका बड़ा मकसद वाराणसी के बीच से गुजरने वाले ट्रैफिक को नया रास्ता देना और शहर की मौजूदा सड़कों पर दबाव कम करना है. 43.218 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार होने के बाद वाराणसी को एक नई तेज कनेक्टिविटी मिल सकती है. इससे स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं, पर्यटकों, छात्रों और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए शहर में सफर आसान होने की उम्मीद है.

