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Bollywood song : दिग्गज गीतकार जब क्रांतिकारी कविता लिखने के जुर्म में जेल पहुंचे, तो राज कपूर उनसे मिलने गए. उन्होंने गीतकार को एक सिचुएशन दी, जिस पर गीतकार ने तुरंत एक मुखड़ा लिख दिया. राज कपूर ने उन दो लाइनों के लिए उन्हें 1000 रुपये दिए जो उस वक्त में काफी बड़ी रकम थी. 17 साल बाद उस मुखड़े पर कालजयी गाना रिकॉर्ड हुआ, जिसे मुकेश ने गाया था.
फिल्म ‘तीसरी कसम’ के लिए गाना रिकॉर्ड हुआ था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
नई दिल्ली: बात उस दौर की है जब देश नया-नया आजाद हुआ था. एक क्रांतिकारी मिजाज के गीतकार गोष्ठियों और मुशायरों में अपनी क्रांति से भरी कविताएं-गजलें सुनाते थे. बलराज साहनी उनके अच्छे दोस्त थे. उन्हें एक दफा मजदूरों की एक सभा में बुलाया गया. वे जब बलराज साहनी के साथ कवि सम्मेलन में पहुंचे, तो मजदूरों ने भी कुछ क्रांतिकारी लाइनें उनके लिए भी पढ़ने की गुजारिश कर दी.
गीतकार ने कुछ पंक्तियां मजदूरों के लिए पढ़ी, जिसकी लाइनें कुछ ऐसी थीं- ‘दिल में ख्वाब डॉलर का बसाकर फिरती है भारत की अहिंसा.’ लोगों ने उस वक्त इन चंद पंक्तियों को खूब पसंद किया. गीतकार की कविता को मीडिया ने भी हाइलाइट किया. सत्ता-प्रशासन में बैठे कुछ लोगों को उनकी कविता रास नहीं आई, जिसकी वजह से उन्हें और बलराज साहनी को दो साल जेल की सजा हुई. गीतकार को जिस वक्त जेल हुई, उस वक्त उनकी पत्नी गर्भवती थीं. घर के हालात भी अच्छे नहीं थे. जब राज कपूर को उनके हालात के बारे में पता चला, तो उन्होंने उनकी मदद करने का फैसला किया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज कपूर ने उनसे कहा कि वे दुनिया पर एक गीत चाहते हैं. यह क्यों बनी, कैसे बनी, इस पर कोई लाइन लिख दो.
मुखड़ा लिखने के लिए दिए 1000 रुपये
गीतकार ने तुरंत गाने का मुखड़ा लिख दिया. वो कालजयी पंक्तियां थीं- ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे दिल में समाई, काहे को दुनिया बनाई.’ हम मजरूह सुल्तानपुरी की बात कर रहे हैं, हालांकि गाने के क्रेडिट में गीतकार का नाम हसरत जयपुरी लिखा है. फिर कैसे ये दो लाइन दूसरे गीतकार के नाम हुआ? इसके पीछे भी दिलचस्प किस्सा है. मजरूह तुल्तानपुरी ने जब गाने का मुखड़ा लिखकर दिया, तो राज कपूर ने उन्हें 1000 रुपये दिए, जो 1948-49 में बड़ी मोटी रकम थी. दरअसल, राज कपूर उनकी किसी तरह मदद करना चाहते थे, लेकिन जानते थे कि गीतकार खुद्दार है, वे इस तरह मदद नहीं लेंगे. इसलिए, उन्होंने मजरूह सुल्तानपुरी से दो पंक्तियां लिखवाई थीं.
फिल्म ‘तीसरी कसम’ का कालजयी गाना
वाकये को 17 साल गुजर गए. राज कपूर जब फिल्म ‘तीसरी कसम’ पर काम कर रहे थे, तब उन्होंने गीतकार शैलेंद्र के सामने मजरूह के गीत की दो लाइनें रख दीं. मगर शैलेंद्र काफी व्यस्त थे. वे फिल्म के प्रोड्यूसर थे. उन्होंने यह पंक्तियां हसरत जयपुरी को थमा दीं. उन्होंने फिर इसके अंतरे तैयार किए. शंकर-जयकिशन ने इसे कंपोज किया. मुकेश की आवाज में रिकॉर्ड हुए गीत ने गजब कर दिया. आज भी लोग इसे बहुत पसंद करते हैं. मजरूह सुल्तानपुरी को जब यह गीत दिखाया गया, तो उन्होंने इसका क्रेडिट हसरत जयपुरी को देने के लिए कहा. इसलिए, हर जगह गाने के साथ गीतकार का नाम हसरत जयपुरी दर्ज है, मगर यह भी सच है कि इसका मुखड़ा मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था.
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अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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