• Contact US
  • Privacy Policy
Sonebhadra Live
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
Sonebhadra Live
No Result
View All Result

गाजीपुर के कोट किला में विराजमान हैं दक्षिणावर्ती गणेश, जानें 300 साल पुराने मंदिर की कहानी

Admin by Admin
September 14, 2026
in उत्तर प्रदेश
0
गाजीपुर के कोट किला में विराजमान हैं दक्षिणावर्ती गणेश, जानें 300 साल पुराने मंदिर की कहानी

[ad_1]

गाजीपुरः शहर का इतिहास सिर्फ गंगा के घाटों, पुराने भवनों और ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं है. शहर के चीतनाथ घाट के आसपास का इलाका भी अपने भीतर कई धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं को समेटे हुए है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र को पहले कोट किला के नाम से जाना जाता था. मान्यता है कि कभी यह इलाका राजा गाधी के किले के रूप में पहचाना जाता था और इसी से गाजीपुर के पुराने नाम गाधीपुरी का संबंध बताया जाता है.

कोट किला क्षेत्र में कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, इन्हीं में से एक प्रमुख मंदिर भगवान गणेश का है, जो अपनी बनावट, पुराने धार्मिक परिवेश और प्रतिमा की विशेषता के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखता है.स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा की सूंड दक्षिण दिशा की ओर मुड़ी हुई है. धार्मिक परंपराओं में ऐसी प्रतिमा को विशेष महत्व दिया जाता है. https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-childhood-flavors-desi-superfood-an-ayurvedic-doctor-explains-the-benefits-of-colocasia-leaves-local18-10833456.html ये भी पढ़ें..

दक्षिण दिशा की ओर मुड़ी है गणेश जी की सूंड

मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा को देखने पर उनकी सूंड एक ओर मुड़ी हुई दिखाई देती है.स्थानीय लोगों और मंदिर की देखरेख करने वालों का कहना है कि इसकी दिशा दक्षिण की ओर है, इसी वजह से श्रद्धालु इसे विशेष गणेश प्रतिमा के रूप में देखते हैं. धार्मिक मान्यताओं में दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को कई स्थानों पर दक्षिणावर्ती गणेश कहा जाता है. ऐसी प्रतिमाओं की पूजा को लेकर अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं हैं. हालांकि, इन मान्यताओं में क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अंतर भी मिलता है. मंदिर के लोगों के लिए इस प्रतिमा का महत्व उसकी प्राचीनता, आस्था और वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा से जुड़ा हुआ है.

हर बुधवार जुटते हैं श्रद्धालु

मंदिर की देखरेख करने वाली ऊषा बताती हैं कि यहां हर बुधवार श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने आते हैं। उनके अनुसार, यह मंदिर काफी पुराना है और इसकी उम्र ढाई से तीन सौ साल से कम नहीं मानी जाती. ऊषा के मुताबिक, बुधवार के अलावा भी लोग नियमित रूप से यहां पूजा करने पहुंचते हैं। माघ महीने में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस प्राचीन मंदिर में पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है. हालांकि, मंदिर की वास्तविक स्थापना तिथि या इसके निर्माण से जुड़े प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज सामने नहीं आए हैं. इसलिए इसकी प्राचीनता को स्थानीय मान्यता और मंदिर से जुड़े लोगों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

राजा गाधी के समय का होने का दावा

स्थानीय निवासी मनोज बताते हैं कि कोट किला क्षेत्र में मौजूद यह गणेश मंदिर सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है. वह खुद नियमित रूप से यहां पूजा करने आते हैं। उनके अनुसार, मंदिर की दीवारों, रंगीन चित्रकारी, नक्काशी और बनावट को देखकर लगता है कि इसका संबंध बहुत पुराने समय से रहा होगा. मनोज का कहना है कि स्थानीय लोग इस मंदिर को राजा गाधी के समय से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, राजा गाधी के काल से मंदिर का सीधा संबंध स्थापित करने के लिए पुरातात्विक या ऐतिहासिक प्रमाणों की जरूरत होगी। फिलहाल यह बात स्थानीय परंपरा और लोगों की मान्यता के तौर पर सामने आती है.

दीवारों पर दिखती है पारंपरिक कारीगरी

मंदिर की तस्वीरों में इसकी दीवारों पर बनी रंगीन चित्रकारी और पारंपरिक सजावट साफ दिखाई देती है. प्रवेश द्वार के आसपास फूल-पत्तियों की आकृतियां, रंगीन बॉर्डर और धार्मिक चित्र मंदिर को अलग पहचान देते हैं. अंदर भगवान गणेश की प्रतिमा पीले वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित है. मंदिर के गर्भगृह के आसपास की सजावट में धार्मिक चित्रों के साथ-साथ पारंपरिक लोक कला की झलक भी दिखाई देती है फर्श पर काले और सफेद रंग की टाइलें, पुराने ढंग की चौखट और मंदिर परिसर में लगे पीतल के घंटे इसकी पुरानी धार्मिक पहचान को और मजबूत करते हैं.

आस्था के साथ इतिहास की तलाश

कोट किला क्षेत्र का यह गणेश मंदिर स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ पूजा का स्थान नहीं है. यह उस पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश का हिस्सा है, जिसके बारे में पीढ़ियों से कई मान्यताएं सुनाई जाती रही हैं. फिलहाल, मंदिर में हर बुधवार जुटने वाली भीड़, माघ महीने में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या और प्रतिमा की दक्षिण दिशा की ओर मुड़ी सूंड इसे गाजीपुर के धार्मिक स्थलों में एक अलग पहचान देती है. यह मंदिर बताता है कि शहर के पुराने मोहल्लों और घाटों के आसपास आज भी ऐसी कई धार्मिक धरोहरें मौजूद हैं, जिनकी कहानी स्थानीय लोगों की स्मृतियों और आस्था में सुरक्षित है.

[ad_2]

Source link

Views: 60
Download Sonebhadra Live App
Previous Post

भारत में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी टूर्नामेंट खेलने आएगा पाकिस्तान, हो गया ऐलान, Hockey Hindi News

Next Post

सोनभद्र. हिंदी दिवस पर बच्चों ने वाद-विवाद से दिया मातृभाषा का संदेश

Next Post

सोनभद्र. हिंदी दिवस पर बच्चों ने वाद-विवाद से दिया मातृभाषा का संदेश

Related Posts

  • नंदवारा हत्याकांड में पूर्व मंत्री के बेटे समेत दो गिरफ्तार, कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट, Uttar-pradesh Hindi News नंदवारा हत्याकांड में पूर्व मंत्री के बेटे समेत दो गिरफ्तार, कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट, Uttar-pradesh Hindi News
  • Hindustan Special: मोती पालन और हैचरी स्थापना ने मत्स्यपालक को दी उम्मीद, बजट ने रोकी राह, Uttar-pradesh Hindi News Hindustan Special: मोती पालन और हैचरी स्थापना ने मत्स्यपालक को दी उम्मीद, बजट ने रोकी राह, Uttar-pradesh Hindi News
  • यूपी में वाल्मिकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश, 26 अक्तूबर को बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज, Uttar-pradesh Hindi News यूपी में वाल्मिकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश, 26 अक्तूबर को बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज, Uttar-pradesh Hindi News
  • दूसरी शादी की तैयारी में थी पत्नी, खबर मिलते ही पुलिस लेकर आ गया पहला पति, Uttar-pradesh Hindi News दूसरी शादी की तैयारी में थी पत्नी, खबर मिलते ही पुलिस लेकर आ गया पहला पति, Uttar-pradesh Hindi News
  • जिसके साथ लिव-इन में रहती थी महिला, उस पर करा देती थी केस; पुराने आशिक ने गला घोंटकर मार डाला, Uttar-pradesh Hindi News जिसके साथ लिव-इन में रहती थी महिला, उस पर करा देती थी केस; पुराने आशिक ने गला घोंटकर मार डाला, Uttar-pradesh Hindi News
  • Contact US
  • Privacy Policy

© 2026 Sonebhadra Live News - Design by Cliker Studio.

error: Content is protected !!
No Result
View All Result
  • Contact US
  • Privacy Policy

© 2026 Sonebhadra Live News - Design by Cliker Studio.

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement