कानपुर: ‘मैं वहां घूमने नहीं गया था, नौकरी कर रहा था. पत्नी और बच्चे के साथ मॉस्को में रह रहा था. वर्क वीजा 2028 तक था. सब कुछ सामान्य चल रहा था. अचानक पुलिस ने पकड़ लिया और 48 घंटे तक हमें कुछ नहीं बताया कि आखिर हमारा अपराध क्या है. दोस्त के साथ मारपीट की गई, धमकाया गया. बाद में हम पर एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का आरोप लगा दिया गया’, ये आपबीती सुनाई मॉस्को से लौटे कानपुर के रोबोटिक इंजीनियर चंदन गुप्ता ने.
कानपुर के रोबोटिक इंजीनियर चंदन गुप्ता ने कहा कि 2023 तक रूस में रह चुके थे और अब वर्क वीजा पर पत्नी और बच्चे के साथ मॉस्को में रह रहे थे. वह एक कंपनी में हेड ऑफ ऑटोमेशन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स के पद पर काम कर रहे थे. चंदन के मुताबिक, मेट्रो स्टेशन पर म्यूजिक ग्रुप का वीडियो बनाने के बाद पुलिस ने उन्हें और उनके दोस्त आशीष को पकड़ लिया. इसके बाद 48 घंटे तक हिरासत में रखा. मोबाइल और दस्तावेज छीन लिए. जबरन कागजों पर साइन कराए और 500 रूबल जुर्माना भी लिया.
गलत मामले में पति का फंसाने का आरोप
चंदन की पत्नी स्नेहा ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके पति को गलत मामले में फंसाया और भारतीय दूतावास की ओर से उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली. अब परिवार इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने की तैयारी में है.
वर्क वीजा 2028 तक था
चंदन ने बताया कि वह रूस में पहले भी रह चुके थे. 2023 तक वहां रहे. इसके बाद दोबारा वर्क वीजा पर मॉस्को गए. उनका वर्क वीजा 2028 तक वैध था. वह रोबोटिक इंजीनियर थे और कंपनी में हेड ऑफ ऑटोमेशन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स के पद पर काम कर रहे थे. चंदन ने कहा, ‘मैं अपनी पत्नी और बच्चे के साथ वहां रह रहा था, नौकरी कर रहा था. सब कुछ सामान्य चल रहा था. मुझे नहीं लगा था कि किसी दिन पुलिस इस तरह पकड़ लेगी. वह भी तब, जब मैं अपने दोस्त के साथ घूमने निकला था.’
दोस्त ने हैंगिंग ब्रिज देखने की इच्छा जताई
चंदन के मुताबिक, वह अपने दोस्त आशीष और एक अन्य सहकर्मी के साथ डिनर करने के बाद मॉस्को के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में शामिल रेड स्क्वायर के पास घूम रहे थे. इसी दौरान उनके दोस्त आशीष ने हैंगिंग ब्रिज देखने की इच्छा जाहिर की. चंदन ने बताया कि ब्रिज पास में ही था, इसलिए उन्होंने कहा कि चलो चलते हैं. दोनों ब्रिज देखने के लिए निकल पड़े.
वहां घूमने के बाद जब वापस लौट रहे थे, तो रास्ते में मेट्रो स्टेशन पर एक म्यूजिक ग्रुप परफॉर्म कर रहा था. आशीष ने कहा कि क्या इसका वीडियो फोन पर बना लूं. चंदन ने कहा कि बना लो. आशीष वीडियो बनाने लगा. तभी पीछे से पुलिस वाले आए और दोनों को पकड़ लिया.
पहले गाड़ी में घुमाया, फिर पुलिस स्टेशन ले गए
चंदन ने बताया कि पुलिस वाले उन्हें पकड़कर करीब एक घंटे तक गाड़ी में घुमाते रहे. इसके बाद पुलिस स्टेशन ले गए. वहां उनके मोबाइल और दस्तावेज छीन लिए गए. चंदन ने कहा, ‘हम बार-बार पूछते रहे कि हमें क्यों पकड़ा है, लेकिन कोई सही जवाब नहीं दिया गया. मुझे रूसी भाषा नहीं आती थी. मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि पुलिस वाले क्या कह रहे हैं. मेरे डॉक्यूमेंट और मोबाइल सब ले लिए गए.’
चंदन के मुताबिक, उनकी जैकेट में एक दूसरा फोन पड़ा था, जिस पर पुलिस वालों की नजर नहीं गई. उसी फोन से उन्होंने अपनी कंपनी और सहकर्मियों को मैसेज करके बताया कि वह फंस गए हैं. अपनी लोकेशन भी भेजी. चंदन ने कहा, ‘मैंने किसी तरह कंपनी को मैसेज किया कि हम पुलिस स्टेशन में हैं. हमें पकड़ लिया गया है. कंपनी वालों को जानकारी मिल गई. लेकिन बाद में पुलिस वालों को दूसरे फोन के बारे में पता चल गया. उन्होंने वह फोन भी छीन लिया.’
दोस्त के साथ मारपीट
चंदन ने बताया कि पुलिस वालों ने उन्हें करीब 48 घंटे तक हिरासत में रखा. इस दौरान यह नहीं बताया कि आखिर उन्होंने क्या अपराध किया है. उन्होंने कहा, ‘हमसे बार-बार पूछा जा रहा था कि हमने क्या किया है. लेकिन पुलिस वाले कुछ बताते नहीं थे, बस धमकाते थे. आशीष के साथ मारपीट की गई. उसके साथ काफी बर्बरता हुई. हम दोनों बहुत डर गए थे. समझ नहीं आ रहा था कि हमें किस गलती की सजा दी जा रही है.’
बाद में एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का लगाया आरोप
चंदन के मुताबिक, बाद में पुलिस ने उन पर एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का आरोप लगा दिया. उनका कहना है कि यदि उन्होंने कोई गलत काम किया था तो पुलिस को उसका सबूत दिखाना चाहिए था. उन्होंने कहा, ‘मॉस्को में हर जगह कैमरे लगे हैं. रेड स्क्वायर और मेट्रो स्टेशन पर भी कैमरे हैं. अगर हमने एंबुलेंस का शीशा तोड़ा था तो उसका वीडियो दिखाओ, फोटो दिखाओ. पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था. फिर भी हमें हिरासत में रखा गया.’
कोर्ट में सवाल उठे तो जबरन साइन कराए कागज
चंदन ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों ने मामले में दखल दिया. कानूनी सलाह ली गई और वकील की मदद से कोर्ट में पुलिस से सवाल किया गया कि जब कोई सबूत नहीं है तो उन्हें हिरासत में क्यों रखा गया है. चंदन ने बताया, ‘कोर्ट में पुलिस से पूछा गया कि हमारे खिलाफ क्या सबूत है. अगर हमने कुछ गलत किया है तो वीडियो दिखाओ, फोटो दिखाओ. इसके बाद पुलिस हमें दोबारा स्टेशन ले गई. वहां एक प्रोटोकॉल पर जबरन साइन कराए गए.’
चंदन के मुताबिक, उस कागज में लिखा था कि उन्हें दूसरी भाषा आती है, उन्हें ट्रांसलेटर की जरूरत नहीं है और उनके ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें वह मानते हैं. चंदन के मुताबिक, ‘मुझे रूसी भाषा नहीं आती. फिर भी मुझसे साइन कराए गए. मैंने कहा कि मुझे रूसी नहीं आती, लेकिन पुलिस वालों ने मेरी बात नहीं सुनी. मुझसे जबरन साइन करा लिए, 500 रूबल का जुर्माना भी लिया.’
पत्नी स्नेहा बोलीं- एंबेसी से मदद नहीं मिली
चंदन की पत्नी स्नेहा गुप्ता ने कहा कि पति की गिरफ्तारी के बाद वह अपने बच्चे के साथ मॉस्को में परेशान होती रहीं. उन्हें रूसी भाषा नहीं आती थी. वह यह भी नहीं समझ पा रही थीं कि चंदन को कहां रखा गया है और उन पर क्या आरोप लगाए गए हैं. स्नेहा ने आरोप लगाया कि एंबेसी की ओर से गलत बयान भी जारी कर दिया गया. उनका कहना है कि चंदन के खिलाफ लगाए गए आरोपों के कोई सबूत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस के पास वीडियो या फोटो हैं तो उन्हें सामने लाना चाहिए.
अब सीएम योगी और पीएम मोदी तक पहुंचाएंगे शिकायत
स्नेहा ने कहा कि उनके पति के साथ जो कुछ हुआ, वह बेहद गलत है. वह अब इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने की कोशिश करेंगी. पत्नी बोली, ‘हम इस मामले को छोड़ेंगे नहीं. मेरे पति को गलत तरीके से फंसाया गया. उनके साथ बदतमीजी की गई. पुलिस ने उनके मोबाइल और डॉक्यूमेंट छीन लिए. जबरन साइन कराए. मैं चाहती हूं कि इस मामले की जांच हो और हमें न्याय मिले.’
चंदन ने कहा कि वह अब दोबारा रूस नहीं जाएंगे. उन्होंने बताया कि मॉस्को में बिताए 48 घंटे उनके लिए बेहद डरावने रहे. उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि विदेश में काम करने वाले भारतीयों के साथ इस तरह का बर्ताव न हो. वहीं चंदन और उनकी पत्नी का स्नेह का कहना है कि आप जीवन में कभी रसिया नौकरी करने के लिए नहीं जाएंगे. जिस प्रकार से उनके साथ वहां पर ऐसा बढ़ता हुआ है, उसके बाद अब वह कभी उसे देश जाना पसंद ही नहीं करेंगे.

