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माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया वो गीत जिसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसके तीन-तीन वर्जन बने. पहली बार उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने इस गाने को आवाज दी थी. उसके बाद कविता कृष्णमूर्ति ने इसका फीमेल वर्जन गाया और एक बार फिर इस गाने के रीमिक्स का ‘यारियां 2’ में इस्तेमाल किया गया था. एक ही गाने के तीनों वर्जन जबरदस्त हिट हुए थे.
माधुरी दीक्षित ने अपने एक्सप्रेशन से गाने को अमर बना दिया था.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा से लेकर रीजनल सिनेमा तक अगर कोई गाना या फिल्म हिट होती है तो मेकर्स उसी नाम से कई प्रयोग करते हैं. आंखें, अग्निपथ और गोलमाल जैसे कई उदाहरण हैं. एक बार फिल्म हिट हुए तो हर दौर में मेकर्स ने इन नामों पर दांव लगाया. आज ऐसी किसी फिल्म का नहीं बल्कि एक गाने का जिक्र करने जा रहे हैं जो एक ही नाम से तीन बार बना है. इस गाने का सबसे लोकप्रिय वर्जन वो था जिसमें माधुरी दीक्षित ने अपने चेहरे के भाव से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
ये गीत है ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’, जिसे आज भी सुनते ही माधुरी दीक्षित का वो भावुक चेहरा आंखों के सामने आ जाता है. 1997 में रिलीज हुई राकेश रोशन की फिल्म ‘कोयला’ में शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की जोड़ी नजर आई थी. फिल्म की कहानी एक्शन और ड्रामा से भरी थी, लेकिन इसके बीच ‘सांसों की माला’ ऐसा गीत बनकर सामने आया, जिसने फिल्म के भावनात्मक पक्ष को बेहद खूबसूरती से उभारा. इस गाने को कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी आवाज दी थी. इसका संगीत राकेश रोशन के भाई राजेश रोशन ने तैयार किया था. वहीं इसके बोल इंदीवीर ने लिखे थे.
कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में गूंजा था गीत
माधुरी के एक्सप्रेशन्स ने किया अमर
गाने की लोकप्रियता में कविता कृष्णमूर्ति की आवाज का भी बड़ा योगदान रहा. उनकी आवाज में मौजूद ठहराव और दर्द ने गीत को एक अलग भाव दिया. राजेश रोशन की धुन और इंदीवर के शब्दों के साथ कविता की आवाज ने इसे ऐसा रूप दिया, जो फिल्म से निकलकर सुनने वालों के दिल की यादों में बस गया था. ‘कोयला’ के साउंडट्रैक में यह गीत लगभग 6 मिनट 48 सेकंड लंबा है.
फिल्म कोयला में माधुरी दीक्षित ने सांसों की माला पर… गाते हुए जमकर डांस किया था और उन्होंने अपने पिया को खूब याद किया. वो इस गाने में फूट-फूटकर रो पड़ी थीं जिसे देख थिएटर में बैठे हर दर्शक का दिल पसीज उठा था. कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में ये गीत पर्दे पर अमर हो उठा था.
नुसरत फतेह अली खान ने दिया कालजयी गीत
इस गाने का सबसे पहला वर्जन उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया था. इसको आज के दौर के बीच राहत फतेह अली खान ने लोकप्रिय बनाया. उन्होंने नुसरत फतेह अली खान को ट्रिब्यूट देते हुए इस गाने को दोबारा गाया था. उस्ताद नुसरत फतेह अली गाना का वर्जन सबसे ओरिजिनल माना जाता है.
अब इस गाने के सबसे लेटेस्ट वर्जन की बात करें तो इसका इस्तेमाल दिव्या खोसला कुमार और यश स्टारर फिल्म ‘यारियां 2’ में हुआ था. इस फिल्म में गाने के रीमिक्स वर्जन का इस्तेमाल किया गया था. इस पुराने गाने के रीमिक्स को मनन भारद्वाज ने कंपोज किया है और इस गाने को आवाज सचेत टंडन ने दी है.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…
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