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Indian Railway News: इंडियन रेलवे अपने पैसेंजर्स का हर तरीके से ख्याल रखने की कोशिश करता है. इसके बावजूद अनेकों बार ऐसी घटनाएं होती हैं, जिससे गंभीर सवाल उठते हैं. ट्रेनों में कूड़े-कचरों का ढेर उनमें से एक है. रेलवे ने इससे निपटने के लिए नई योजना तैयार की है.
भारतीय रेलवे ट्रेनों में कचरे से तंग आ चुका है. अब इसके लिए खास प्लानिंग की गई है. (फाइल फोटो)
Indian Railway News: भारतीय रेलवे हमेशा अपने यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का प्रयास करता है. यह कोशिश साल के बारहों महीने चलती रहती है. इसके बावजूद कुछ न कुछ कमियां रह जाती हैं, जिन्हें समय-समय पर दूर किया जाता है. ऐसी ही एक समस्या को दूर करने के लिए इंडियन रेलवे ने नई योजना तैयार की है. जी हां…यहां बात हो रही है ट्रेनों की बोगियों में जमा होने वाले कूड़े-कचरे की. रेलवे ने अधिकांश ट्रेनों में अल्ट्रा मॉडर्न सुवधाओं से लैस LHB कोच (Linke-Hofmann-Busch Coach) लगाकर उन्हें अपग्रेड किया है. लेकिन, इन प्रीमियम बोगियों में कूड़े की समस्या लंबे समय से चली आ रही है. दरअसल, इन कोचों में लगे कूड़ेदानों की क्षमता कम है, जिससे लंबी दूरी की ट्रेनों में कचरों का ढेर लग जाता है. अब इससे निपटने के लिए ठोस योजना तैयार की गई है. इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से की जा रही है.
दरअसल, लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच कचरा प्रबंधन की चुनौती पैदा हो गई है. इससे निपटने के लिए रेलवे अब लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों में बड़ी क्षमता वाला कूड़ादान लगाने की तैयारी में है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से रोजाना करीब 100 यात्री ट्रेनें गुजरती हैं, जिनसे लगभग 3 टन कूड़ा निकलता है. मौजूदा एलएचबी कोचों के कूड़ेदानों की क्षमता सीमित होने से सफाई कर्मचारियों को बार-बार कचरा उठाना पड़ता है. देरी पर प्रीमियम र्टेनों की बोगियों में कूड़े का ढेर लग जाता है. इस समस्या के समाधान के लिए झांसी स्थित वैगन रिपेयर वर्कशाप ने हाई कैपेसिटी की कूड़ा इकट्ठा करने वाले सिस्टम का प्रोटोटाइप तैयार किया है. नई व्यवस्था में कचरा संग्रह क्षमता 18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर हो जाएगी. यानी करीब 20.4 गुना तक की वृद्धि.
क्या है समस्या
LHB कोच से लैस ट्रेनों के सीमित क्षमता वाले डस्टबिन यात्रियों के कचरे से जल्दी भर जाते हैं. इसके बाद कचरा बाहर फैलने लगता है, जिससे कोच की स्वच्छता प्रभावित होती है और सफाई कर्मचारियों को सफर के दौरान बार-बार कचरा उठाना पड़ता है. नई प्रणाली में ज्यादा मात्रा में कचरा जमा हो सकेगा, जिससे यह समस्या काफी कम हो जाएगी. अब कचरा टैंक को ट्रेन के रखरखाव के दौरान खाली किया जा सकेगा, जिससे सफाई व्यवस्था बेहतर होगी.
स्टील कलेक्टर तक पहुंचेगा कचरा
‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के अनुसार, नई व्यवस्था की खासियत यह है कि कचरे को टैंक तक पहुंचाने के लिए किसी अलग मशीन की जरूरत नहीं होगी. कोच के फर्श पर यात्रियों की पहुंच में एक कूड़ादान लगाया जाएगा. इसके नीचे सेंट्रल कनेक्टर के जरिये कचरा कोच में लगे स्टील बॉक्स तक पहुंचेगा और वहां से सीधे संग्रह टैंक में गिर जाएगा. इसके लिए ग्रैविटेशनल फोर्स यानी गुरुत्वाकर्षण बल का इस्तेमाल किया जाएगा.
राजधानी, दुरंतो समेत कई ट्रेनों को मिलेगा फायदा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से रोजाना बड़ी संख्या में लंबी दूरी की एलएचबी ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें राजधानी, दुरंतो, नेताजी, विभूति, वंदे भारत और हिमगिरी जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं. नई प्रणाली को मंजूरी मिलने पर डीडीयू होकर गुजरने वाली इन सभी ट्रेनों में भी इसे लागू किए जाने की उम्मीद है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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