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शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए तितली घर एक खास आकर्षण है. चिड़ियाघर के दूसरे हिस्सों से अलग इसकी बनावट और यहां का माहौल पर्यटकों को तितलियों की खूबसूरत दुनिया के करीब ले जाता है. यहां पहुंचते ही ऐसा लगता है जैसे आप किसी अलग ही प्राकृतिक संसार में आ गए हों. तितली घर को इस तरह तैयार किया गया है कि, पर्यटक एक तरफ से इसमें प्रवेश करते हैं और घूमते हुए दूसरी तरफ से बाहर निकलते हैं.
गोरखपुर: शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए तितली घर एक खास आकर्षण है. चिड़ियाघर के दूसरे हिस्सों से अलग इसकी बनावट और यहां का माहौल पर्यटकों को तितलियों की खूबसूरत दुनिया के करीब ले जाता है. यहां पहुंचते ही ऐसा लगता है जैसे आप किसी अलग ही प्राकृतिक संसार में आ गए हों. तितली घर को इस तरह तैयार किया गया है कि, पर्यटक एक तरफ से इसमें प्रवेश करते हैं और घूमते हुए दूसरी तरफ से बाहर निकलते हैं. इस दौरान उनके चारों तरफ अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे और उड़ती हुई तितलियां दिखाई देती हैं. खास बात यह है कि इस पूरे स्थान को केवल पर्यटकों के घूमने के लिए नहीं, बल्कि तितलियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी तैयार किया गया है.
पसंदीदा पौधे पर बैठती हैं तितलियां
चिड़ियाघर के डॉक्टर योगेश बताते हैं कि, यहां तितलियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है. तितलियां उड़ते हुए तितली घर में आती हैं और अपनी पसंद के पौधे पर जाकर बैठ जाती हैं. वह वहां कितनी देर रहेंगी, इसका कोई तय समय नहीं होता. जब तक उन्हें वहां का माहौल अच्छा लगता है, वे उसी जगह रहती हैं और फिर उड़कर दूसरी जगह चली जाती हैं. चिड़ियाघर की ओर से तितलियों को आकर्षित करने वाले अलग-अलग तरह के पौधे लगाए जा रहे हैं. इन पौधों की मदद से तितलियों के लिए भोजन और बैठने के अनुकूल जगह तैयार की जा रही है. यही वजह है कि यहां अलग-अलग प्रजातियों की तितलियां लगातार दिखाई देती हैं.
30 से अधिक प्रजातियां हैं मौजूद
अब तक चिड़ियाघर में ’30 से अधिक अलग-अलग प्रजातियों की तितलियां देखी जा चुकी हैं. इनके रंग, आकार और पंखों पर बने अलग-अलग निशान इन्हें एक-दूसरे से अलग बनाते हैं. बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर उम्र के लोगों को तितलियों को इतने करीब से उड़ते और पौधों पर बैठते देखना पसंद आता है. डॉक्टर योगेश के मुताबिक यहां आने वाली तितलियों में ‘टाइगर तितली को खास माना जाता है. इसके पंखों पर बने निशान और रंग कुछ हद तक बाघ की धारियों जैसे दिखाई देते हैं. इसी वजह से इसे टाइगर तितली कहा जाता है. इसका आकार और खूबसूरत पंख इसे दूसरी तितलियों से अलग पहचान देते हैं.
गोरखपुर चिड़ियाघर का तितली घर सिर्फ तितलियां देखने की जगह नहीं है, बल्कि यहां आने वाले लोगों को प्रकृति को करीब से देखने और समझने का मौका भी देता है. रंग-बिरंगी तितलियों और हरे-भरे पौधों के बीच बिताया गया समय पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव बन जाता है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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