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Pakeezah 4k Restoration World Premiere: 54 साल पहले रिलीज हुई मीना कुमारी की क्लासिक फिल्म ‘पाकीजा’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर नई चमक के साथ लौटने जा रही है. करीब 15 साल में बनी इस फिल्म को अब दो साल की मेहनत के बाद बारीकी से री-स्टोरी किया गया है. फिल्म की री-स्टोरी वर्जन का विश्व प्रीमियर फ्रांस के ल्योन में होने वाले फेस्टिवल लुमीएर में अक्टूबर 2026 में होगा.
‘पाकीजा’ की कहानी जितनी खूबसूरत है, उसका बनने का सफर उतना ही मुश्किल रहा.
नई दिल्ली. लगभग 54 साल पहले, मुंबई के मराठा मंदिर में ‘पाकीजा’ के भव्य प्रीमियर के लिए फिल्म की रीलें एक शाही पालकी में लाई गई थीं. इस ऐतिहासिक और यादगार स्क्रीनिंग में फिल्म के निर्देशक कमाल अमरोही, लीड एक्ट्रेस मीना कुमारी और बॉलीवुड की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुई थीं. करीब 54 साल पहले रिलीज हुई कमाल अमरोही की ‘पाकीजा’ आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत फिल्मों में शुमार है. मीना कुमारी की अदाकारी और फिल्म की शाही दुनिया ने इसे अमर बना दिया, लेकिन इसे पर्दे तक पहुंचने में करीब 15 साल लगे थे. अब इस क्लासिक फिल्म को एक बार फिर नया जीवन मिलने जा रहा है.
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (FHF) ने करीब दो साल की मेहनत के बाद ‘पाकीजा’ का 4K रेस्टोरेशन पूरा किया है. खराब हो चुके ओरिजिनल नेगेटिव और पुराने फिल्म प्रिंट्स से इसकी तस्वीरों और रंगों को सहेजा गया है. अब इसका वर्ल्ड प्रीमियर अक्टूबर में फ्रांस के प्रतिष्ठित फेस्टिवल ल्यूमियर में होगा. इसके बाद लंदन में भी इसकी खास स्क्रीनिंग होगी.
खूबसूरत कहानी का मुश्किल सफल
‘पाकीजा’ की कहानी जितनी खूबसूरत है, उसका बनने का सफर उतना ही मुश्किल रहा. फिल्म की कल्पना 1950s के मध्य में हुई थी और इसे कमाल अमरोही ने अपनी पत्नी और मीना कुमारी की खूबसूरती को श्रद्धांजलि के तौर पर तैयार किया था. लखनऊ के नवाबी दौर की पृष्ठभूमि में बनी इस फिल्म में मीना कुमारी ने तवायफ साहिबजान का किरदार निभाया था.
पाकीजा एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी, जिसमें मीना कुमारी-राज कुमार लीड रोल में नजर आए थे.
मीना-अमाल ने साथ शुरु की शूटिंग फिर आई रिश्ते में दरार
फिल्म की शूटिंग 1956 में ब्लैक एंड व्हाइट में शुरू हुई और 1958 में ईस्टमैनकलर की तरफ बढ़ी. कास्टिंग में बदलाव, स्क्रिप्ट में बदलाव, बजट की परेशानियां और अमरोही की प्रोफेशनलिज्म के कारण फिल्म को पूरा होने में करीब 14-15 साल लग गए. 1964 में अमरोही और मीना कुमारी के रिश्ते में आई दूरी के बाद फिल्म का काम रुक गया. इसके बाद 1968 में मीना कुमारी कोलिवर सिरोसिस का पता चला. हालांकि, सुनील दत्त और नरगिस ने पुरानी फुटेज देखने के बाद उन्हें फिल्म पूरी करने के लिए प्रेरित किया और प्रोजेक्ट दोबारा आगे बढ़ा.
कई लोगों को खोया
मीना कुमारी ही नहीं दुर्भाग्य से, फिल्म ने पर्दे के पीछे भी कई लोगों को खोया. 1967 में लेजेंडरी सिनेमैटोग्राफर जोसेफ विर्सिंग का निधन हो गया. उनके बाद भारत के कई टॉप सिनेमैटोग्राफर्स ने बारी-बारी से काम पूरा किया ताकि फिल्म का विजुअल एस्थेटिक एक समान रहे. इसी तरह, फिल्म के सदाबहार गीत रचने के बाद 1968 में मशहूर संगीतकार गुलाम मोहम्मद भी दुनिया छोड़ गए, जिसके बाद बैकग्राउंड स्कोर का जिम्मा दिग्गज नौशाद ने संभाला.
रिस्टोरेशन की चुनौतियां और फिल्म की रिलीज
एफएचएफ (FHF) के एक प्रेस नोट के मुताबिक, ‘पाकीजा 4 फरवरी 1972 को सिनेमाघरों में तब रिलीज हुई, जब भारतीय सिनेमा उर्दू-प्रभावित स्टूडियो मेलोड्रामा से हटकर एक्शन ब्लॉकबस्टर फिल्मों की तरफ मुड़ रहा था.’ मीना कुमारी का 31 मार्च 1972 को दुखद निधन हो गया और इसके बाद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बेतहाशा सफलता मिली. रिस्टोरेशन प्रक्रिया को याद करते हुए एफएचएफ के निदेशक शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर बताते हैं, ‘जब मैंने ओरिजिनल कैमरा नेगेटिव का मुआयना किया, तो वह लगभग पिघल चुका था. हमारे पास काम करने के लिए जो अन्य फिल्म सामग्री थी, वह भी अच्छी स्थिति में नहीं थी. उनमें खरोंचें थीं, फफूंद लगी थी और रंग उड़ चुके थे. लेकिन रिसर्च के दौरान हमें ओरिजिनल फिल्म की तस्वीरें मिलीं जिनसे काफी मदद मिली.’ टीम ने रामनॉर्ड लैब से इंटरपॉजिटिव (IP) और सिनेमास्कोप प्रिंट के साथ-साथ NFDC-NFAI द्वारा संरक्षित कलर रिवर्सल इंटरनेगेटिव का इस्तेमाल करके इस क्लासिक को फिर से नया जीवन दिया है.
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