सोनभद्र की बाला बनी उत्तर प्रदेश की रोल माडल

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सोनभद्र (विकास द्विवेदी)

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– बाला बच्चों के लिए है खुली किताब

सोनभद्र। महत्वाकांक्षी जनपद सोनभद्र के लिए गौरव की बात है कि मिशन सोन स्कूल कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में लागू बाला (बिल्डिंग एज लर्निंग ऐड) की योजना जिसमें जिला प्रशासन के द्वारा चयनित 200 विद्यालय, डिनर विद डीएम प्रतियोगिता के तहत चयनित विद्यालय और स्वस्फूर्त शिक्षकों के विद्यालय सम्मिलित हैं।अब केवल सोनभद्र तक सीमित न रह कर सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के लिए आदर्श बन गया है।शिक्षा निदेशक (बेसिक) डॉ सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह द्वारा जारी पत्र ने सोनभद्र के लिए प्रकाशित आधार पुस्तिका बाला पत्रिका के आधार पर सभी जिलों में पांच-पाँच विद्यालयों में बाला को विकसित करने का निर्देश दिया है।डिनर विथ डीएम की प्रतिभागी शिक्षिका ऋतू सिंह जिसने गायघाट पर बाला पर काम किया है।

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सोनभद्र के जिला प्रशासन, सभी शिक्षकों, पंचायतीराज विभाग, ग्राम प्रधानों और पिरामल फाउंडेशन के इस पहल को प्रदेश स्तर पर पहचान मिल गई है।सोनभद्र नीति आयोग द्वारा चयनित 115 महत्वाकांक्षी जिलों में से एक है।जिसमें प्रगति करने की अपार क्षमता मौजूद है। अनुकूल वातावरण न मिलने के कारण जिस प्रकार पौधा विकास नहीं कर पाता है।उसी प्रकार सोनभद्र भी शिक्षा क्षेत्र में अपनी क्षमता के अनुरूप विकास नहीं कर पा रहा था।ऐसे वातावरण को विकसित करने के लिए जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह की अध्यक्षता में मिशन सोन स्कूल कायाकल्प समिति का गठन किया गया।नीति आयोग के निर्धारित सूचकांकों पर बनी कार्य योजनाओं और समन्वयित जिम्मेदारियों से शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विद्यालय का आमूलचूल परिवर्तन ही सोन स्कूल कायाकल्प है।यह न केवल विद्यालयों के भौतिक संसाधनों बल्कि शैक्षणिक उपलब्धि स्तर को उत्कृष्ट बनाने के लिए कृत संकल्प है।मिशन सोन स्कूल कायाकल्प के तहत पंचायतीराज विभाग प्रथम चरण में 100 विद्यालयों पर यूनिसेफ के WASH (वाटर, सैनिटेशन, हाइजिन) को ध्यान में रखते हुए शौचालय और पेयजल की सुविधा को उपलब्ध करायेगा।राज्य शैक्षणिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा पिछले सत्र में अर्ली ग्रेड रीडिंग (EGR) का प्रशिक्षण प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए वृहद पैमाने पर चलाया था।जिसमें प्रिंट रिच इनवायरमेंट पर प्रमुखता से बल दिया गया था और इसका परिणाम सकारात्मक दिखा था।बाला उसी की एक अगली कड़ी है।राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2017 के परिणाम प्रदर्शित करते हैं कि भाषा की समृद्धि के अनुपात में ही छात्रों की शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित होती है।ऐसे में बाला छात्रों में भाषा की समझ को और भी सुदृढ़ करते हुए अन्य विषयों की समझ और गुणवत्ता को सुधारने में अभूतपूर्व सहयोग करेगा।सभी परिषदीय विद्यालयों को BaLA (बिल्डिंग एज अ लर्निंग ऐड) में विकसित किया जाएगा।प्रिंट रिच इनवायरमेंट से बच्चों में पुनरावृत्ति, विचारोत्त्पत्ति और भाषा विकास सरल और मनोरंजक तरीके से संपन्न होता है।पिरामल फाउंडेशन इसके लिए कंटेंट उपलब्ध करवा रहा है और पंचायतीराज के साथ मिलकर इस लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

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BALA में विद्यालय की इमारत को सीखने-सिखाने के अनुकूल बनाया जाता है जो कि बच्चों के अवधारणाओं का अभ्यास और परीक्षण करने में मदद करता हैं। वास्तविक, ठोस अनुभवों के साथ, बच्चे आसानी से सीख सकते हैं जो कि बच्चो को हर जगह से सीखने में भी मदद करता है- कक्षा में, गलियारे, बरामदे, मैदान, दरवाजे, खिड़की, फर्श और छत आदि।सोनभद्र जिले में 1000 प्रारंभिक विद्यालयों में BaLA कराने का निर्णय किया है लेकिन प्राथमिक विद्यालय बहुअरा में मुख्यमत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्पूर्ण विद्यालयों का कायाकल्प के तहत विकास करने की बात कही गयी है।अतः अब क्रमशः 1 विद्यालय, 5 विद्यालय, 100 विद्यालय, 1000 विद्यालय और फिर सम्पूर्ण 2458 को विकसित किया जायेगा।वर्तमान में ग्राम पंचायत में समस्त 41 परिषदीय अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय और 159 परिषदीय हिन्दी माध्यम के विद्यालय मिशन सोन स्कूल कायाकल्प के तहत विकसित किए जा रहे हैं।इन्ही विद्यालयों पर डिनर विद डीएम प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे फ़ाईन आर्ट्स के छात्र, शिक्षक और गैर पेशेवर चित्रकार बाल केन्द्रीत शिक्षा की सामग्री को मूर्त रूप प्रदान कर रहे हैं।इस प्रतियोगिता के विजेता को पंद्रह हजार, उपविजेता को बारह हजार और तृतीय स्थान के लिए नौ हजार रूपये प्रदान किया जायेगा और समस्त प्रतिभागियों को जिला प्रशासन की तरफ से इंटर्नशीप का प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा।यह अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है।

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बाला क्या और क्यों है ?

बाला स्कूल की बुनियादी ढांचे का समग्र रूप से योजना बनाने और उपयोग करने का एक तरीका है। इसमें सामान्य के साथ-साथ विशेष जरूरत वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए गतिविधि आधारित शिक्षा, बाल मित्रता और समावेशी शिक्षा के विचार शामिल हैं।विद्यालय की वास्तुकला शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं के लिए एक प्रभावशाली संसाधन साबित हो रही है।बाला बच्चों के लिए विद्यालय के प्रांगण को ही एक खुली किताब बना देता है।जिससे बच्चे का मस्तिष्क इन्हें देखते ही उद्दीपित हो जाता है।इससे बच्चा व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से चिन्तन मनन कर सकता है।यह कक्षा,  गलियारा, पायदान और सीढ़ियां, आउटडोर जगह, स्टेज, शौचालय, चाहरदीवारी, खिड़की, दरवाजा, छत, पंखा, खम्भा, फर्नीचर, मंच सभी को आकर्षक बनाने के साथ सूचना और ज्ञान प्रदान करने की पुस्तक में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।बाला वह झरोखा है जहाँ से विद्यालय में आने वाला प्रत्येक बच्चा उन वस्तुओं, जगहों और घटनाओं से दो चार होता है। जिसे उसे देखने का मौका नहीं मिलता है।यह प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता के अनुरूप अपने विचार विकसित करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।यह टीएलएम के चोरी या गलत जगह लगे होने की अनुमति नहीं देता है और इसलिए यह व्यवस्थित रह सकता है।यह शिक्षकों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें अनुकूलित करने की अनुमति देता है।यह अधिक स्थायी और टिकाऊ है।

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