इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली मुहावरों की जिंदगी, जिम्मेदार कौन?

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दुद्धी से विशेष रिपोर्ट जितेंद्र अग्रहरि की…

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– आज भी मुसहर बिरादरी के लोग बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे

– सबका विकास करने वाली सरकार इनका विकास कब करेगी यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है

दुद्धी। आज की इक्कीसवीं सदी में जहां लोग चांद तारे पर जाकर नित्य नए खोज से दुनिया को अचंभित करने में लगे हुए हैं।वहीं दूसरी ओर आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे कुछ जातियों के लोग आज भी जानवरों सरीखा जीवन व्यतीत करने को विवश है।जी हां हम बात कर रहे हैं जनपद सोनभद्र के सुदूरवर्ती तहसील मुख्यालय दुद्धी से करीब 2 किलोमीटर दूर खजूरी ग्राम के ठेमा नदी किनारे डेरा डाले मुसहर जाति के लोगों की जिन्हें आज अपने हाल पर शासन प्रशासन के द्वारा छोड़ दिया गया है।

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उनके खान पान, रहन सहन, दैनिक दिनचर्या किसी के भी मन को झकझोर कर रख देने वाली है।बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे इन परिवारों को कोई भी सरकारी सुविधा नहीं मिली, ना तो इनको राशन कार्ड जारी किया गया और ना ही उज्जवला योजना के तहत गैस, न शौचालय,ना ही आवास।जीवन की जटिलताओं से जूझ रहे इनके बच्चों की स्थिति और भी ज्यादा दयनीय है, ना तो इनके तन पर कपड़ा है और ना ही पोषण की उचित व्यवस्था नही है।यह आज भी नाले का गन्दा पानी पीते हैं।आखिर इसका दोष क्या है? जो इन्हें तमाम सरकारी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।

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इन बस्ती में रास्ता, पेयजल, विद्युतीकरण, सारी बुनियादी समस्याओं का अभाव बरकरार है।प्रदेश में विकास का ढिंढोरा पीटने वाली योगी सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।भले ही आज हमारा देश विकास के दौड़ में अपना एक जगह बना चुका है परंतु इस अन्धे दौड़ में अपने ही देश के कुछ ऐसे हिस्से है जो समाज और विकाश के मुख्यधारा से  बिल्कुल ही कट गए हैं।आज भी उन्हें आधुनिक युग कैसा होता है यह एक सपने जैसा ही लगता है।आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी पूर्व से लेकर अब तक कि सरकारे इस ओर ध्यान नही दे रही है।जिससे इनकी स्थिति जस की तस रह गयी है।यह आज भी प्रागैतिहासिक काल के जैसा जीवन यापन करने को विवश है।

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यहा के लोग ऐसे युग में रह रहे है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।इनके बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते क्योकि इनके घरों में खाने के लिए कुछ है ही नहीं जिसके कारण सभी अपने पूरे परिवार का पेट भरने के लिए भीख माँगने चले जाते है और शाम तक घर वापस आकर परिवार के वृद्ध व्यक्ति से लेकर अपना पेट भीख मांगी हुई वस्तु से भरते हैं।इस प्रकार इस बस्ती के लोगो का जीवन यापन होता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जो सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा देकर सत्ता पर काबिज हुई थी वह अपने विकास के एजेंडे से भटक गयी है जिसका जीता जागता उदाहरण यहाँ की मुसहर बस्ती है।

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