“बाबू वेणीबहादुर सिंह स्मृति पुस्तकालय एवं शोध केंद्र” का प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री ने किया शिलान्यास

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घोरावल (करूणाकर/विजय अग्रहरि)

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घोरावल। उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मन्त्री डॉ. सरजीत सिंह डंग ने घोरावल तहसील के देवगढ़ गाँव में ‘बाबू वेणीबहादुर सिंह स्मृति पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र’ का शिलान्यास किया।श्रीकाशीधर्मपीठ के राष्ट्रीय प्रवक्ता पण्डित उमाशंकर मिश्र ‘रसेन्दु’ के आचार्यत्व में पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र का भूमि-पूजन करने के पश्चात् डॉ. डंग ने कहा कि प्रभाश्री ग्रामोदय सेवा आश्रम देवगढ़ के द्वारा उच्चस्तरीय शोध-कार्य हेतु सन् 1999 ई. में ‘बाबू वेणीबहादुर सिंह स्मृति सार्वजनिक पुस्तकालय’ की स्थापना की गयी थी।सम्प्रति इस पुस्तकालय में 30000 पुस्तकें, 6000 पत्र-पत्रिकाएँ एवं ढाई लाख दुर्लभ ई-बुक्स सुरक्षित हैं।इतनी दुर्लभ पुस्तकों से समृद्ध होने के बाद भी पुस्तकालय के पास अपना निजी भवन न होना चिन्ताजनक था।इसलिए आज पुस्तकालय के निजी भवन का भूमि-पूजन किया गया है।आदिवासी बहुल इलाक़े में बिना किसी सरकारी अनुदान के संचालित होनेवाला यह अपने तरह का एकलौता पुस्तकालय है।यह पुस्तकालय ज्ञान-पिपासुओं को उचित सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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इसी क्रम में डाॅ. डंग ने बताया कि ‘देवगढ़ महोत्सव’ के संयोजक डाॅ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’ के नेतृत्व में संचालित इस पुस्तकालय में उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री राम नाईक, भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मन्त्री कलराज मिश्र, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पूर्व न्यायमूर्ति पण्डित गिरिधर मालवीय, मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मन्त्री इन्द्रजीत सिंह पटेल, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कृष्णविहारी पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रो. विनयकुमार पाठक, रीतिकाल के महान् आलोचक प्रो. किशोरीलाल, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराजराजेन्द्र मिश्र, महान् गाँधीवादी विचारक एवं पूर्व कुलपति प्रो. टी. करुणाकन्, अविरल गंगा के लिए संकल्पबद्ध प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. जी. डी. अग्रवाल (स्वामी ज्ञानस्वरूप सानन्द), सी. वी. रामन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. ए. एस. झाड़गाँवकर, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के परियोजना निदेशक डाॅ. बी. एल. मल्ला, बीरबल साहनी पुरावनस्पति संस्थान के प्रख्यात वैज्ञानिक डाॅ. सी. एम. नौटियाल, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. इन्द्राणी चट्टोपाध्याय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. उमेशचन्द्र चट्टोपाध्याय, नेशनल आटोनाॅमस युनिवर्सिटी ऑफ़ मैस्किको (दक्षिणी अमेरिका) के ख्यातिलब्ध भू-वैज्ञानिक डाॅ. लुईस एम. अल्वा-वाल्डिविया सहित देश-विदेश की अन्यान्य विभूतियों का समय समय पर पदार्पण हुआ है।पूर्व कैबिनेट मन्त्री ने कहा कि हमारी संकल्पना है कि सोनभद्र के इस आरण्यक क्षेत्र में एक ऐसे पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की स्थापना हो, जहाँ प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान को विश्व-पटल पर पुनः स्थापित करने का पुनीत कार्य सम्पन्न हो सके।शोध-कार्य करनेवाले शोधार्थियों को वे सभी पुस्तकें एवं पाण्डुलिपियाँ सुलभ हो सकें, जो बड़े बड़े महानगरों के विश्वविद्यालयों एवं शोध केन्द्रों में भी उपलब्ध नहीं हैं।इस अवसर पर कविराज पण्डित रमाशंकर पाण्डेय ‘विकल’, श्यामसुन्दरदेव पाण्डेय, डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’, राजर्षि बाबू रामप्रसाद सिंह, बाबू महेन्द्रबहादुर सिंह, आलोचक डॉ. इन्द्रबहादुर सिंह, धर्मेन्द्रकुमार सिंह ‘राजेश’, ज्ञानेन्द्रकुमार सिंह ‘बृजेश’, डॉ. परमेश्वरदयाल श्रीवास्तव ‘पुष्कर’, अमरेशचन्द्र ‘अम्बर’, विजय अग्रहरि, अशोक सिंह, मानवेन्द्रनाथ तिवारी, नन्दे मूर्तिकार, बबनू कोल, प्रभाशंकर सिंह, अरविन्द आदि गणमान्य उपस्थित रहे।

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